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बीए सेमेस्टर-3 राजनीति विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2650
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-3 राजनीति विज्ञान

प्रश्न- दबाव समूह किसे कहते हैं? दबाव समूह के कार्यों को लिखिए। भारत की राजनीति में दबाव समूहों की भूमिका की चर्चा कीजिए।

उत्तर -

दबाव समूह : अभिप्राय 

दबाव समूह (Pressure group) को विभिन्न नामों से सम्बोधित किया जाता है जैसे-हित समूह ( Interest group), गैर सरकारी संगठन (Non governmental organisations), लॉबीज (Lobbies ), अनौपचारिक संगठन (Informal groups ), गुट आदि। दबाव समूह व अन्य संगठनों में अन्तर अवश्य है। सभी संगठन दबाव समूह नहीं होते और न हित समूह दबाव समूह समान ही हैं। प्रत्येक समाज में सैंकड़ों हित समूह होते हैं, किन्तु जब वे सत्ता को प्रभावित करने के इरादे से राजनीतिक दृष्टि से सक्रिय हो जाते हैं तो 'दबाव समूह' बन जाते हैं।

दबाव समूह का अर्थ एवं परिभाषा
(Meaning and Definition of Pressure Group)

दबाव समूह विशेष हितों के साथ जुड़े ऐसे व्यक्ति संगठन हैं जो अपने सदस्य के हितों की रक्षा के लिए सार्वजनिक नीति को प्रभावित करने की चेष्टा में रहते हैं। दबाव समूहों की कुछ प्रमुख परिभाषा निम्नलिखित हैं-

ओडेगार्ड के अनुसार, "दबाव समूह ऐसे लोगों का औपचारिक संगठन है जिसके एक या अधिक सामान्य उद्देश्य अथवा स्वार्थ होते हैं और जो घटनाओं के क्रम को विशेष रूप से सार्वजनिक नीति के निर्माण और प्रशासनिक कार्यों को इसलिए प्रभावित करने का प्रयत्न करते हैं कि वे अपने हितों की रक्षा व वृद्धि कर सकें। "

एच. जेगलर के शब्दों में, “दबाव समूह ऐसा संगठित समूह है जो अपने सदस्यों को सरकारी पदों पर बिठाये बिना सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने की इच्छा रखते हैं।"

माइरन वीन्नर के शब्दों में, “दबाव समूह से हमारा तात्पर्य शासकीय व्यवस्था से बाहर किसी भी ऐसे ऐच्छिक, किन्तु संगठित समूह से है जो शासकीय अधिकारियों की नामजदगी अथवा नियुक्ति, सार्वजनिक नीति के निर्धारण. उसके प्रशासन और समझौता व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास करत है। "

स्पष्ट शब्दों में इन दबाव गुटों को सार्वजनिक नीति को प्रभावित करने के उद्देश्य हेतु 'गैर सरकारी समूह' कहा जाता है। उदाहरणास्वरूप, व्यवसायों, उद्योगों, श्रमिकों आदि अन्य वर्गों के समूह प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं जिनसे वे अपने हितों में कानून बनवा सकें या उनके हितों को हानि पहुँचाने वाले कानूनों को वापस करके अथवा उसमें संशोधन के लिए प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर सकें।

संक्षेप में दबाव समूह से अभिप्राय ऐसे संगठन से है जो-

(1) अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए नीति-निर्माताओं को प्रभावित करते हैं।
(2). जिनका सम्बन्ध विशिष्ट मसलों (Specific issues) से होता है।
(3) ये राजनीतिक संगठन नहीं होते और न ही चुनावों में भाग लेते हैं।
(4) इन्हें अज्ञात साम्राज्य (Anonymous Empire) कहा गया है। जब इनके हित खतरे में होते हैं तो वे सक्रिय हो जाते हैं।

दबाव समूह के कार्य

प्रारम्भ में दबाव समूहों को अनैतिक संगठन मानते हुये घृणा की दृष्टि से देखा जाता था, जनतन्त्रीय धारणा में दबाव समूहों का कोई विशेष स्थान नहीं था, परन्तु धीरे-धीरे दबाव समूह की स्थिति में परिवर्तन आया है। राजनीतिक व्यवस्था में अब दबाव समूहों के महत्व को समझा जाने लगा है और इसे राजनीतिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य मान लिया गया, वर्तमान समय में लगभग सभी पक्षों द्वारा इसके अस्तित्व को अपना लिया गया है कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में दबाव समूह केवल आवश्यक ही नहीं वरन् वांछनीय भी है।

दबाव समूहों के कार्य और उनकी उपयोगिता तथा महत्व के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं--

(1) शासन के लिए सूचनाएँ एकत्रित करने वाले संगठनों के रूप में दबाव समूह - प्रत्येक देश में सरकार तथा शासन के पास आवश्यक सूचनाएँ पर्याप्त रूप से होनी चाहिए। शासन की सूचनाओं के गैर-सरकारी स्रोत के रूप में दबाव समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दबाव समूह आँकड़े इकट्ठे करते हैं, तथा सरकार को अपनी समस्याओं से परिचित करवाते हैं।

(2) जनतांत्रिक प्रक्रिया की अभिव्यक्ति के साधन - दबाव समूहों को प्रजातंत्र की अभिव्यक्ति का गठन माना जाता है। प्रजातंत्र की आवश्यकता के लिए जनमत तैयार करना आवश्यक है जिससे विशेष नीतियों का समर्थन अथवा विरोध कर सके। विभिन्न देशों में दबाव समूह विभिन्न तरीकों से अपनी बात मनवाने का प्रयास करता है। जनता को शिक्षित करना, आँकड़े इकट्ठे करना, निर्माताओं के पास सूचनाएँ पहुँचाना आदि अनेक कार्य करके अपने उद्देश्य की प्राप्ति करना आज प्रजातान्त्रिक व्यवस्था का अंग बन गया है।

(3) समाज और शासन में सन्तुलन स्थापित करना - दबाव समूह के अस्तित्व से एक लाभ यह है कि विभिन्न हितों के बीच सन्तुलन कायम रहता है।

(4) व्यक्ति और सरकार के मध्य संचार के साधन - प्रजातांत्रिक व्यवस्था में दबाव समूह व्यक्तिगत हितों के साथ सामंजस्य स्थापित करते हैं। दबाव समूह व्यक्ति और सरकार के बीच संचार साधन का काम करता है।

(5) शासन को प्रभावित करने वाले संगठनों के रूप में दबाव समूह - दबाव समूहों का अस्तित्व वर्तमान समय में एक ऐसी संस्था के रूप में है जिनके पास संगठन की दृष्टि से काफी शक्ति होती है कि वह स्वार्थ या हित विशेष की रक्षा के लिए सरकारी मशीनरी पर उपयोगी व सफल प्रभाव डाल सके।

(6) शासन की निरंकुशता को सीमित करना – प्रत्येक शासन व्यवस्था में केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही है और समूची शक्तियाँ सरकार के हाथों में केन्द्रित होती जा रही हैं। दबाव समूह अपने साधनों द्वारा सरकारी निरंकुशता को सीमित करते हैं।

(7) विधानमण्डल के पीछे विधानमण्डल का कार्य - दबाव समूह विधि निर्माण में विधेयकों की सहायता करते हैं। अपनी विशेषता तथा महत्व के कारण ये समूह विधि-निर्माणकर्त्ता समितियों के सदस्यों को आवश्यक परामर्श देता है। इनका परामर्श और सहायता दोनों की इतनी उपयोगिता होती है कि इन्हें विधानमण्डल के पीछे विधानमण्डल कहा जाने लगा है।

 

भारतीय राजनीति में दबाव समूहों की भूमिका - भारत में दबाव समहों की भूमिका को निम्नांकित शीर्षकों के अन्तर्गत वर्णित किया जा सकता है -

(1) नीति-निर्माण के महत्वपूर्ण घटक - भारतीय राजनीति में दबाव समूहों की नीति निर्माण की प्रक्रिया में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। किसी भी सामाजिक, आर्थिक विषय पर यह जनमत को प्रशिक्षित व जागरूक करके सरकार पर दबाव की स्थिति उत्पन्न करने में समर्थ्य हैं और फलस्वरूप सरकार की नीतियों में इनकी माँगों के अनुरूप परिवर्तन हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर ' भूमि अधिग्रहण बिल' में सरकार को किसान संगठनों की माँगों को अन्ततः काफी हद तक स्वीकार करना ही पड़ा।

(2) राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हित स्पष्टीकरण व समूहीकरण के दिशा-निर्धारक - दबाव समूह राज व्यवस्था के भीतर जनता से सीधे सम्पर्क में रहते हैं। यह किसी मुद्दे पर जनता को जागरूक करने हेतु सम्मेलनों, यात्राओं, धरना, प्रदर्शन, गोष्ठियों इत्यादि की सहायता लेते हैं और अधिक से अधिक जनमत को अपने अनुरूप प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। इसी प्रक्रिया में यह हित स्पष्टीकरण एवं हितों के समूहीकरण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को भी सम्पन्न करते हैं। उदाहरण के तौर पर नर्मदा बचाओं आन्दोलन, चिपको आन्दोलन इत्यादि इसी प्रकार प्रेरित आन्दोलन थे।

(3) राजनीतिक सौदेबाजी के माध्यम – भारतीय राजनीति में दबाव समूहों की भूमिका राजनीतिक सौदेबाजी के माध्यमों के रूप में भी दिखाई पड़ती है। ये प्रत्यक्ष राजनीति में तो भाग नहीं लेते हैं और स्वयं को गैर-राजनीतिक बताते हैं परन्तु वास्तविकता में सत्ता के करीब रहना और अपने कुत्सित हितों के अनुरूप सत्ता व राजनीतिक दलों से सम्बन्ध बनाए रखना इनकी प्रवृत्ति बनती जा रही है। यह राजनीतिक दलों के मध्य सौदेबाजी व साँठ-गाँठ के माध्यम भी बनते जा रहे हैं और कई बार तो यह अपने प्रेरक राजनीतिक दल के इशारों पर ही सक्रिय या निष्क्रिय होते हैं।

(4) राजव्यवस्था एवं जनता के मध्य की कड़ी – भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक दल राज-व्यवस्था व जनता के मध्य कड़ी के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। अनेक अवसरों पर यह जनहित से जुड़े मामलों में राजव्यवस्था व प्रशासन पर तब तक दबाव बनाये रखते हैं जब तक कि जनहित से जुड़े मामले का निराकरण न कर दिया जाए।

इस प्रकार भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में दबाव समूहों की मिश्रित भूमिका नजर आती है। एक ओर तो यह जनहित के रक्षक हैं तो दूसरी ओर स्वहितों के पोषक भी हैं।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- सन 1909 ई. अधिनियम पारित होने के कारण बताइये।
  2. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, (1909 ई.) के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
  3. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, 1909 ई. के मुख्य दोषों पर प्रकाश डालिए।
  4. प्रश्न- 1935 के भारत सरकार अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  5. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, 1935 ई. का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  6. प्रश्न- 'भारत के प्रजातन्त्रीकरण में 1935 ई. के अधिनियम ने एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। क्या आप इस कथन से सहमत हैं?
  7. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, 1919 ई. के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालिए।
  8. प्रश्न- सन् 1995 ई. के अधिनियम के अन्तर्गत गर्वनरों की स्थिति व अधिकारों का परीक्षण कीजिए।
  9. प्रश्न- माण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919 ई.) के प्रमुख गुणों का वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- लोकतंत्र के आयाम से आप क्या समझते हैं? लोकतंत्र के सामाजिक आयामों पर प्रकाश डालिए।
  11. प्रश्न- लोकतंत्र के राजनीतिक आयामों का वर्णन कीजिये।
  12. प्रश्न- भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को आकार देने वाले कारकों पर प्रकाश डालिये।
  13. प्रश्न- भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को आकार देने वाले संवैधानिक कारकों पर प्रकाश डालिये।
  14. प्रश्न- संघवाद (Federalism) से आप क्या समझते हैं? क्या भारतीय संविधान का स्वरूप संघात्मक है? यदि हाँ तो उसके लक्षण क्या-क्या हैं?
  15. प्रश्न- भारतीय संविधान संघीय व्यवस्था स्थापित करता है। संक्षेप में बताएँ।
  16. प्रश्न- संघवाद से आप क्या समझते हैं? संघवाद की पूर्व शर्तें क्या हैं? भारत के सन्दर्भ में संघवाद की उभरती हुई प्रवृत्तियों की चर्चा कीजिए।
  17. प्रश्न- भारत के संघवाद को कठोर ढाँचे में नही ढाला गया है" व्याख्या कीजिए।
  18. प्रश्न- राज्यों द्वारा स्वयत्तता (Autonomy) की माँग से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- क्या भारत को एक सच्चा संघ (True Federation) कहा जा सकता है?
  20. प्रश्न- संघीय व्यवस्था में केन्द्र शक्तिशाली है क्यों?
  21. प्रश्न- क्या भारतीय संघीय व्यवस्था में गठबन्धन की सरकारें अपरिहार्य हैं? चर्चा कीजिए।
  22. प्रश्न- क्या क्षेत्रीय राजनीतिक दल भारतीय संघीय व्यवस्था के लिए संकट है? चर्चा कीजिए।
  23. प्रश्न- केन्द्रीय सरकार के गठन में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- भारत में गठबन्धन सरकार की राजनीति क्या है? गठबन्धन धर्म से क्या तात्पर्य है?
  25. प्रश्न- भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के विषय में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
  26. प्रश्न- राजनीतिक दलों का वर्गीकरण करें। दलीय पद्धति कितने प्रकार की होती है? गुण-दोषों के आधार पर विवेचना कीजिए।
  27. प्रश्न- दलीय पद्धति के लाभ व हानियाँ क्या हैं?
  28. प्रश्न- भारतीय दलीय व्यवस्था में पिछले 60 वर्षों में आए परिवर्तनों के कारणों की चर्चा कीजिए।
  29. प्रश्न- आर्थिक उदारवाद के इस युग में भारत में गठबंधन की राजनीति के भविष्य की आलोचनात्मक चर्चा कीजिए।
  30. प्रश्न- दलीय प्रणाली (Party System) में क्या दोष पाये जाते हैं?
  31. प्रश्न- दबाव समूह व राजनीतिक दलों में क्या-क्या अन्तर है?
  32. प्रश्न- भारत में क्षेत्रीय दलों के उदय एवं विकास के लिए उत्तरदायी तत्व कौन से हैं?
  33. प्रश्न- 'गठबन्धन धर्म' से क्या तात्पर्य है? क्या यह नियमों एवं सिद्धान्तों के साथ समझौता है?
  34. प्रश्न- क्षेत्रीय दलों के अवगुण, टिप्पणी कीजिए।
  35. प्रश्न- सामुदायिक विकास कार्यक्रम क्या है? सामुदायिक विकास कार्यक्रम का क्या उद्देश्य है?
  36. प्रश्न- 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  37. प्रश्न- पंचायती राज से आप क्या समझते हैं? ग्रामीण पुननिर्माण में पंचायतों के कार्यों एवं महत्व को बताइये।
  38. प्रश्न- भारतीय ग्राम पंचायतों के दोषों की विवेचना कीजिए।
  39. प्रश्न- ग्राम पंचायतों का ग्रामीण समाज में क्या महत्व है?
  40. प्रश्न- क्षेत्र पंचायत के संगठन तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।
  41. प्रश्न- जिला पंचायत का संगठन तथा ग्रामीण समाज में इसकी भूमिका की विवेचना कीजिए।
  42. प्रश्न- भारत में स्थानीय शासन के सम्बन्ध में 'पंचायत राज' के सिद्धान्त व व्यवहार की आलोचना कीजिए।
  43. प्रश्न- नगरपालिका क्या है? तथा नगरपालिका के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- नगरीय स्वायत्त शासन की विवेचना कीजिए।
  45. प्रश्न- ग्राम सभा के प्रमुख कार्य बताइये।
  46. प्रश्न- ग्राम पंचायत की आय के प्रमुख साधन बताइये।
  47. प्रश्न- पंचायती व्यवस्था के चार उद्देश्य बताइये।
  48. प्रश्न- ग्राम पंचायत के चार अधिकार बताइये।
  49. प्रश्न- न्याय पंचायत का गठन किस प्रकार किया जाता है?
  50. प्रश्न- ग्राम पंचायत से आप क्या समझते तथा ग्राम सभा तथा ग्राम पंचायत में क्या अन्तर है?
  51. प्रश्न- ग्राम पंचायत की उन्नति के लिए सुझाव दीजिए।
  52. प्रश्न- ग्रामीण समुदाय पर पंचायत के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
  53. प्रश्न- भारत में पंचायत राज संस्थाएँ बताइये।
  54. प्रश्न- क्षेत्र पंचायत का ग्रामीण समाज में क्या महत्व है?
  55. प्रश्न- ग्राम पंचायत के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा क्या प्रयास किये गये हैं?
  56. प्रश्न- नगर निगम के संगठनात्मक संरचना का वर्णन कीजिए।
  57. प्रश्न- नगर निगम के भूमिका एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  58. प्रश्न- नगरीय स्वशासन संस्थाओं की समस्याओं का वर्णन कीजिए।
  59. प्रश्न- नगरीय निकायों की संरचना पर टिप्पणी लिखिए।
  60. प्रश्न- नगर पंचायत पर टिप्पणी लिखिए।
  61. प्रश्न- दबाव व हित समूह में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
  62. प्रश्न- दबाव समूह से आप क्या समझते हैं? दबाव समूहों के क्या लक्षण हैं? दबाव समूहों द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली के विषय में बतायें।
  63. प्रश्न- दबाव समूह अपने हित पूरा करने के लिए किस प्रकार कार्य करते हैं?
  64. प्रश्न- दबाव समूहों के महत्व पर प्रकाश डालिये।
  65. प्रश्न- भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के विषय में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
  66. प्रश्न- दबाव समूह किसे कहते हैं? दबाव समूह के कार्यों को लिखिए। भारत की राजनीति में दबाव समूहों की भूमिका की चर्चा कीजिए।
  67. प्रश्न- मतदान व्यवहार क्या है? मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले तत्वों की विवेचना कीजिए।
  68. प्रश्न- दबाव समूह व राजनीतिक दलों में क्या-क्या अन्तर है?
  69. प्रश्न- दबाव समूहों के दोषों का वर्णन करें।
  70. प्रश्न- भारत में श्रमिक संघों की विशेषताएँ। टिप्पणी कीजिए।
  71. प्रश्न- भारत में निर्वाचन पद्धति के दोषों को स्पष्ट कीजिए।
  72. प्रश्न- भारत में निर्वाचन पद्धति के दोषों को दूर करने के सुझाव दीजिए।
  73. प्रश्न- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1996 के अंतर्गत चुनाव सुधार के संदर्भ में किये गये प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
  74. प्रश्न- क्या निर्वाचन आयोग एक निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र संस्था है? स्पष्ट कीजिए।
  75. प्रश्न- चुनाव सुधारों में बाधाओं पर टिप्पणी कीजिए।
  76. प्रश्न- मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले तत्व बताइये।
  77. प्रश्न- चुनाव सुधार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
  78. प्रश्न- अलगाव से आप क्या समझते हैं? अलगाववाद के कारण क्या हैं?
  79. प्रश्न- भारतीय राजनीति में धर्म की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  80. प्रश्न- धर्मनिरपेक्षता से आप क्या समझते हैं? धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक पक्ष को स्पष्ट कीजिए।
  81. प्रश्न- सकारात्मक राजनीतिक कार्यवाही से क्या आशय है? इसके लिए भारतीय संविधान में क्या प्रावधान किए गए हैं?
  82. प्रश्न- जाति को परिभाषित कीजिए। भारतीय राजनीति पर जातिगत प्रभाव का अध्ययन कीजिए। जाति के राजनीतिकरण की विवेचना भी कीजिए।
  83. प्रश्न- निर्णय प्रक्रिया में राजनीतिक दलों में जाति की क्या भूमिका है?
  84. प्रश्न- राज्यों की राजनीति को जाति ने किस प्रकार प्रभावित किया है?
  85. प्रश्न- क्षेत्रीयतावाद (Regionalism) से क्या अभिप्राय है? इसने भारतीय राजनीति को किस प्रकार प्रभावित किया है? क्षेत्रवाद के उदय के क्या कारण हैं?
  86. प्रश्न- भारतीय राजनीति पर क्षेत्रवाद के प्रभावों का अध्ययन कीजिए।
  87. प्रश्न- क्षेत्रवाद के उदय के लिए कौन-से तत्व जिम्मेदार हैं?
  88. प्रश्न- भारत में भाषा और राजनीति के सम्बन्धों पर प्रकाश डालिये।
  89. प्रश्न- उर्दू और हिन्दी भाषा को लेकर भारतीय राज्यों में क्या विवाद है? संक्षेप में चर्चा कीजिए।
  90. प्रश्न- भाषा की समस्या हल करने के सुझाव दीजिए।
  91. प्रश्न- साम्प्रदायिकता से आप क्या समझते हैं? साम्प्रदायिकता के उदय के कारण और इसके दुष्परिणामों की चर्चा करते हुए इसको दूर करने के सुझाव बताइये। भारतीय राजनीति पर साम्प्रदायिकता का क्या प्रभाव पड़ा? समझाइये।
  92. प्रश्न- साम्प्रदायिकता के उदय के पीछे क्या कारण हैं?
  93. प्रश्न- साम्प्रदायिकता के दुष्परिणामों की चर्चा कीजिए।
  94. प्रश्न- साम्प्रदायिकता को दूर करने के सुझाव दीजिये।
  95. प्रश्न- भारतीय राजनीति पर साम्प्रदायिकता के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
  96. प्रश्न- जाति व धर्म की राजनीति भारत में चुनावी राजनीति को कैसे प्रभावित करती है। क्या यह सकारात्मक प्रवृत्ति है या नकारात्मक?
  97. प्रश्न- "वर्तमान भारतीय राजनीति में धर्म, जाति तथा आरक्षण प्रधान कारक बन गये हैं।" इस पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए।
  98. प्रश्न- 'जातिवाद' और सम्प्रदायवाद प्रजातंत्र के दो बड़े शत्रु हैं। टिप्पणी करें।
  99. प्रश्न- उत्तर प्रदेश के बँटवारे की राजनीति को समझाइए।
  100. प्रश्न- जन राजनीतिक संस्कृति के विकास के कारण का वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- 'भारतीय राजनीति में जाति की भूमिका' संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  102. प्रश्न- चुनावी राजनीति में भावनात्मक मुद्दे पर प्रकाश डालिए।
  103. प्रश्न- भ्रष्टाचार से क्या अभिप्राय है? भ्रष्टाचार की समस्या के लिए कौन से कारण उत्तरदायी हैं? इस समस्या के समाधान के लिए उपाय बताइए।
  104. प्रश्न- भ्रष्टाचार के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं?
  105. प्रश्न- भ्रष्टाचार उन्मूलन के कौन-कौन से उपाय हैं?
  106. प्रश्न- भारत में राजनैतिक, व्यापारिक-औद्योगिक तथा धार्मिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की विवेचना कीजिए।
  107. प्रश्न- भ्रष्टाचार क्या है? भारत के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक एवं धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार का वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- भारत के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक एवं धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार का वर्णन कीजिए।
  109. प्रश्न- भ्रष्टाचार के प्रभावों की विवेचना कीजिए।
  110. प्रश्न- सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार की रोकथाम के सुझाव दीजिये।
  111. प्रश्न- भ्रष्टाचार से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  112. प्रश्न- भ्रष्टाचार की विशेषताओं को बताइए।
  113. प्रश्न- लोक जीवन में भ्रष्टाचार के कारण बताइये।
  114. प्रश्न- राष्ट्रपति शासन क्या है? यह किन परिस्थितियों में लागू होता है? राष्ट्रपति शासन लगने से क्या परिवर्तन होता है?
  115. प्रश्न- दल-बदल की समस्या (भारतीय राजनैतिक दलों में)।
  116. प्रश्न- राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के सम्बन्धों पर वैधानिक व राजनीतिक दृष्टिकोण क्या है? उनके सम्बन्धों के निर्धारक तत्व कौन-से हैं?
  117. प्रश्न- दल-बदल कानून (Anti Defection Law) पर टिप्पणी कीजिए।
  118. प्रश्न- संविधान के क्रियाकलापों पर पुनर्विलोकन हेतु स्थापित राष्ट्रीय आयोग (2002) की दलबदल नियम पद संस्तुति, टिप्पणी कीजिए।

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